अयोध्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि दोनों ही पक्षों के पास टाइटल के सबूत नहीं हैं

अयोध्या राम-जन्मभूमि मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि हिन्दू और मुस्लिम, दोनों ही पक्षों के पास विवादित स्थल के टाइटल के ठोस और पर्याप्त सबूत नहीं हैं। ऐसी स्थिति में साक्ष्य क़ानून की धारा 110 के तहत किसी एक पक्ष को भू-स्वामी कैसे घोषित किया जा सकता है! क्या दोनों के पास सबूत न होने से भूमि किसी तीसरे पक्ष अर्थात सरकार को दी जा सकती है?
ये विचार न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच न्यायाधीशों की पीठ ने उस समय व्यक्त किए जब हिन्दू-पक्षकार के वकील ने दलील दी कि भूमि के स्वामित्व का अधिकार उनके पक्ष में घोषित किया जा सकता है क्योंकि विवादित स्थल पर उनका क़ब्ज़ा अबाधित और लगातार रहा है जिसके आधार पर साक्ष्य क़ानून की धारा 110 के तहत भूमि के स्वामित्व की कल्पना उनके पक्ष में की जा सकती है।

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