स्वस्थ लोकतन्त्र के लिए जीवन्त न्यायपालिका बेहद ज़रूरी है – ऐन. वी. रमण

ऐन. वी. रमण ने कहा कि लोकतन्त्र की गुणवत्ता न्याय की गुणवत्ता पर निर्भर करती है

भारत के मुख्य न्यायाधीश ऐन. वी. रमण ने कहा है कि एक स्वस्थ लोकतन्त्र के लिए जीवन्त न्यायपालिका बेहद ज़रूरी है। ऐन. वी. रमण ने कहा कि लोकतन्त्र की गुणवत्ता न्याय की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। रमण ने कहा कि न्यायपालिका में नियुक्तियों की वजह से लम्बित मुक़द्दमों का बोझ कुछ कम होगा। ऐन. वी. रमण पैन इण्डिया लीगल अवेयरनैस ऐण्ड ऑउटरीच कैम्पेन के उद्घाटन के मौक़े पर बोल रहे थे।
ऐन. वी. रमण ने कहा कि मई के बाद हमने उच्च न्यायालयों में 106 से ज़्यादा जजों की नियुक्ति की सिफ़ारिश की है। रमण ने कहा कि सरकार ने कुछ सिफ़ारिशों को मंज़ूरी दे दी है।
ऐन. वी. रमण ने कहा कि देश के लोगों को यह महसूस करना चाहिए कि क़ानून और संस्थान सभी के लिए हैं। रमण ने कहा कि लोगों का विश्वास एक लोकतान्त्रिक देश के संस्थानों को मज़बूत करता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) का लक्ष्य होना चाहिए कि ज़रूरतमन्द लोग हम तक नहीं पहुँच सकें तो हम ज़रूरतमन्द लोगों तक पहुँचें।

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