हिमाचल के चायल की खड़ियून पक्षीशाला में किया जा रहा है चैहड़ तीतर का संरक्षण व प्रजनन

हिमाचल प्रदेश के चायल की खड़ियून पक्षीशाला में विलुप्त होते चैहड़ तीतर का संरक्षण व प्रजनन किया जा रहा है। इण्टरनैशनल यूनियन फ़ॉर कन्ज़र्वेशन ऑफ़ नेचर (आईयूसीऐन) की सूची में दर्ज चैहड़ तीतर का अस्तित्व संकट में है।
मानव-आबादी के आसपास छोटे वृक्षों और घास के मध्यम ऊँचाई के ढलान वाले क्षेत्रों में रहने वाला चैहड़ तीतर भारत, और पाकिस्तान के हिमालयी क्षेत्र और पूर्व में नेपाल तक छोटे-छोटे खण्डित क्षेत्रों में पाया जाता है।
क्षेत्र-विशेष के खण्डित होने, वनों में आग लगने की घटनाओं और अन्य किसी प्रकार से शिकार होने के कारण चैहड़ तीतर का अस्तित्व संकट में है। इस पक्षी के सामने उत्पन्न संकट को देखते हुए केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने वर्ष 2007 में चैहड़ तीतर को संरक्षण-प्रजनन के लिए चिन्हित किया था। संरक्षण-प्रजनन का मुख्य उद्देश्य इस पक्षी की एक ऐसी संख्या तैयार करना है जो कि वन में जीवित रह सके। कुछ वर्षों के व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक प्रबन्धन से चायल की खड़ियून पक्षीशाला में अब तक 75 स्वस्थ व सक्षम चैहड़ तीतर पैदा किए जा चुके हैं।

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