लोकसभा में पीयूष गोयल द्वारा बजट ग़लत पढ़े जाने से भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। पाँच लाख रुपये तक वार्षिक आय वालों को कर-मुक्त करने की घोषणा के दौरान बजट-भाषण में पाँच लाख रुपये की टैक्सेबल इनकम को टैक्स फ़्री पढ़ा गया जैसा कि बजट-भाषण में भी लिखा था। इसका सीधा फ़ायदा दस लाख, पन्द्रह लाख और बीस लाख रुपये तक की वार्षिक आय के करदाताओं को मिलता क्योंकि उनकी कुल आय में पाँच लाख रुपये पर कोई टैक्स नहीं लगता जबकि वास्तविक स्थिति यह नहीं थी।